पति नहीं बल्कि किसी और ने चूत की गर्मी शांत की

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दोस्तों आपको पायल के तरफ से प्यार भरा नमस्कार और बहुत बहुत प्यार। आज मैं आपको अपनी चुदाई की कहानी सूना रही हु, ये कहानी ज्यादा दिन की नहीं है ये खेल अब चल रहा है और और उम्मीद करती हु की ये कभी भी ख़तम नहीं होने बाला खेल है क्यों की पति में तो दम है नहीं की वो मुझे चोद सके और कौन ऐसी गदराई माल बाली औरत  होगी जो बिना चुदे अपनी ज़िंदगी काट लेगी। दोस्तों आज मैं आपको पूरी कहानी बताने जा रही हु।

मैं दिल्ली में रहती हु अपने पति के साथ शादी के हुए सिर्फ आठ महीने हुए हैं। ऐसे मैं पलवल की रहने वाली हु, शादी के बाद दिल्ली आ गई हु।  शादी के बाद आजतक कभी भी मेरी सेक्स की तड़प कम नहीं हुई क्यों की मुझे मेरा पति चोद ही नहीं पाता है, वो सिर्फ मेरी चूत चाटता है और मेरी चूचियों को मसलता है, और जब वो मेरी चूत में वो अपना चार इंच का लंड  डालने की कोशिश करता है चूत  के ऊपर ही झड़ जाता है।  उस समय मुझे कैसा लगता होगा आप समझ सकते हैं। मैं कई बार उसको लात मारी पर करू तो क्या बस तकिये को दबा कर सो जाती थी। पर धीरे धीरे मेरा मन बिचलित होने लगा और मैं चुदने को आतुर होने लगी।

मेरे मोहल्ले में कई मर्द और लड़के थे जिसको मैं अपनी चूत की गर्मी दे सकती थी पर मैं ऐसा खेल खेलना चाहती थी जिसमे रिस्क कम हो और हमेशा के लिए चुदाई का मजा मिलता रहे। ऐसे तो घूरने वाले कई थे क्यों की मेरी चूचियां काफी आगे तक उभरी और टाइट है। गोल गोल गांड बाहर के तरफ निकला हुआ। साडी पहनती हु और वो भी अपने नाभि से निचे और पेट पतला है बहुत ही सेक्सी लगती हु, गांड और सीना दोनों बहुत चौड़ा, जांघें मोटी मोटी मस्त चीज हु जैसा की कई आवारा किस्म  बाइक पर आते जाते रास्ते में छेड़ जाते हैं।

जिस मकान में रहती हु उसी की ऊपर बाले फ्लोर पर विनय भाई साहब रहते हैं उनकी उम्र ज्यादा से ज्यादा 30 साल की होगी। वो अभी अकेले रहते हैं उनकी पत्नी अक्सर गाँव में रहती है। वो हरेक महीने गाँव जाते हैं। मुझे विनय भाई साहब से ही सेक्स सम्बन्ध और अपनी चूत  की गर्मी को बुझाने सोचने लगी। पर करूँ क्या धीरे धीरे डोरे डालने लगी और कामयाब हो गई। एक दिन मेरे पति गाँव चले गए क्यों की मेरी सास की तबियत खराब हो गई थी। मैं घर में अकेले थी।  मेरे घर में पानी नहीं था पता नहीं कुछ दिक्कत मेरे टंकी में हो गई थी तो रात को करीब आठ बजे मैं विनय भाई साहब का दरवाजा खटखटाई वो अंदर से खोले और वो मुझे देखकर बोले भाभी जी आप क्या बात है मैं क्या मदद कर सकता हु, मैं बोली आज मेरे यहाँ पानी नहीं है और गर्मी ज्यादा है क्या मैं आपके यहाँ नहा लूँ? वो बोले अरे ये कोई पूछने की बात है आपका घर है, और मैं निचे आकर कपडे ले गई ऊपर।

जब उनके घर अंदर गई तो देखि विनय भाई साहब दारू पि रहे थे और नमकीन खा रहे थे। देखते ही बोले बस  मेरा यही सहारा है भाभी जी, पत्नी तो गाँव में रहती है तनहा ज़िंदगी काट रहा हु, मैं मुस्कुराते हुए बोली आपकी पत्नी तो यहाँ नहीं रहती है भाई साहब तब आप तनहा ज़िंदगी जी रहे हैं और मेरे साथ तो मेरा पति भी है तब मैं तनहा ही हु और एक कातिल निगाह से देखते हुए बाथरूम में चली गई।

मैं सोच रही थी पता नहीं तीर निशाने पर लगा की नहीं और कपडे खोलने लगी और अपने गोरी बदन पर पानी डालने लगी, तभी में देखि की विनय भाई साहब बाथरूम के दरवाजे में छोटे छेद से मुझे देख रहे हैं, अब मैं साबुन लगाने लगी पूरी नंगी हो कर नहा रही थी अब साबुन लगाना शुरू कर दी और चूचियों पर आज थोड़ा ज्यादा ही साबुन लगाई और मसली चूत पर भी खूब पानी डाली आगे से पीछे से मैं खूब अपने जिस्म को दिखाई विनय भाई साहब को ताकि वो गरम हो जाये और मुझे पेल दे।

थोड़े देर बाद नहा कर निकली पर ब्रा नहीं पहनी और ऊपर से मैक्सी जो की सेलेक्स नाईट गाउन था उसमे से तो जिस्म के अंग अंग ऐसे ही दीखते हैं उसमे से  भीगा हुआ था तो एक एक जिस्म के पार्ट दिख रहे थे चूचियों की गोलाई से लेकर निप्पल और गांड से लेकर जांघ तक मेरे कपडे चिपके हुए थे, बाहर निकलते ही विनय भाई  ही खड़े हो गए और बोले आप कितनी खूबसूरत है भाभी जी ? काश मेरी पत्नी ऐसी होती तो मैं उसको गावों नहीं छोड़ता। तो मैं बोली कोई बात नहीं आप मुझे ही बना लीजिये अपनी रखैल इतना सुनते हि वो कहने लगे, भाभी जी आज से आपको कमी नहीं होने दूंगा, आपको जो भी लेना है पैसे जेवर कपडे मैं दूंगा बस आप मेरी हो जाओ तो मैं बोली वो तो बाद में ले लेंगे फिलहाल आज का क्या प्रोग्राम हैं। वो बोले आप बताओ? बन्दा हाजिर है…

तभी मैं अपने नाईटी को उतार दी और उनके पास पहुंच कर ग्लास में अपने लिए पेग बनाई और उनके लिए भी और फिर चियर्स कर के पि गए और फिर उन्होंने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और बैडरूम में ले गए, उन्होंने अपने सारे कपडे उतार दिए और फिर मेरे होठ को चूसने लगे, उनकी मजबूत पकड़ मेरी जिस्म को तार तार कर रहा था और मैं सिसकियाँ ले रही थी, मेरे जिस्म में आग लग रही थी मेरी चूत  में गर्मी हो रही थी और पूरी गीली हो गई थी, तभी विनय जी निचे गए और मेरी चूत को चाटने लगे मैं उनका बाल पकड़ कर चटवाने लगी, वो उठे और दारू का बोतल लाये और थोड़ा थोड़ा मेरी चूत पर डाल कर चाटने लगे मैं भी बहोत मजे लेने लगी.

उसके बाद वो दारू मेरी चूचियों पर डाले और चाटने लगे, फिर वो मेरे होठ को चूसने लगे, उसके बाद वो मुझे उलट दिए और मेरी गांड में दारु डाल कर चाटने लगे। दोस्तों आज मैं बहुत खुश थी मैं  खूब मजे ले रही थी। फिर उन्होंने अपना लौड़ा मेरे मुँह में डाल दिए और ऊपर निचे करने लगे, क्या बताऊँ आज मैं असल में देखि लौड़ा कैसा होता है आठ इंच लंबा मोटा मेरे मुँह में मुश्किल से जा रहा था। फिर उन्होंने मेरे टांगो को अपने कंधे पर रख लिया और अपना लौड़ा मेरे चूत पर सेट किया और जोर से धक्का मारा “हाई मैं मर गई “मेरे मुँह से आवाज निकली पूरा लौड़ा मेरे चूत के अंदर चला गया था। वो मेरी दोनों चूचियां को अपने हाथो में पकड़ लिया और मेरी चूत में अपना लौड़ा पेलने लगे। मैं आह आह आह आह कर रही थी और वो आह मेरी जान आह मेरी जान और जोर जोर से अपना मोटा लौड़ा मेरी चूत में दाल रहे थे।

उन्होंने मुझे करीब एक घंटे तक चोदा कभी उलट कर कभी पलट कर कभी बैठ कर मेरी चूत पहली बार पानी पानी हुआ था और सफ़ेद क्रीम निकला था विनय जी उस सफ़ेद क्रीम को भी चाट गए थे, फिर उन्होंने मेरे मुँह में अपना सारा वीर्य डाल दिया और फिर दोनों एक दूसरे को पकड़ कर सो गए।  दोस्तों उसके बाद क्या अब मैं बहुत खुश हु।  खूब मजे ले रही हु।  पति जाये माँ चुदाने मुझे लंड मिल गया।

आशा करती हु आपको मेरी कहानी अच्छी लगी होगी, अगर आप दिल्ली के आसपास रहते हैं तो कमेंट करें।  हो सकता है मैं आपकी रंगीन कर सकती हूँ।

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